लॉन संचालन को लेकर नई पालिसी तैयार कर रही कमलनाथ सरकार

भोपाल : कई तरह के नियम-कायदों को ताक पर रखकर मैरिज गार्डन चलाकर चांदी काटने वाले संचालकों के खिलाफ प्रदेश सरकार कड़ा रूख अख्तयार करने की तैयारी कर रही है। बताया गया है कि मनमाने तरीकों से संचालित हो रहे मैरिज गार्डन पर अंकुश लगाने कमलनाथ सरकार नई पॉलिसी ला रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। पॉलिसी की सबसे बड़ी बात यह है कि सड़कों पर पार्किंग कराने और सुरक्षा इंतजामों के बिना संचालित हो रहे मैरिज गार्डन बंद हो जाएंगे, हालांकि इसके पहले भी गार्डन संचालन की गाइडलाइन जारी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में आदेश दे चुका है, लेकिन हकीकत में इसका पालन नहीं हो रहा है।

पब्लिक न्यूसेंस का मामला नहीं :
नए नियम कायदों के मुताबिक कोई भी मैरिज गार्डन 50 फीसदी ओपन एरिया होने पर ही संचालित होंगे। यानी 50 फीसदी हिस्से में ही निर्माण की अनुमति होगी। नई पॉलिसी आने के बाद वर्तमान मैरिज गार्डन्स संचालकों को नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए आवेदन और शुल्क 30 जून 2019 तक जमा कराना होगा। नगर निगम और नगर पालिकाओं के पास मंजूरी के अधिकार होंगे। पॉलिसी के मुताबिक पार्किंग, टॉयलेट्स और अग्नि सुरक्षा के प्रावधानों पर खरे उतरने वालों को ही मैरिज गार्डन्स की अनुमति मिलेगी।
स्कूल, कॉलेज और अस्पताल से 100 मीटर के दायरे में मैरिज गार्डन्स की अनुमति नहीं मिलेगी। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश ने नई पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मैरिज गार्डन्स के लिए नई परिभाषा तय की है। जिसके तहत ऐसा क्षेत्र जहां शादी, रिसेप्शन, सामाजिक बैठकों में 50 से ज्यादा लोग जुटते हों, उसे मैरिज गार्डन्स की अनुमति लेनी होगी। प्रशासन अभी तक इस मामले में गंभीर नहीं हैं, इस वजह से गार्डन संचालक पब्लिक न्यूसेंस कर लोगों को तकलीफ में डालते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती। शहर में करीब 50 से ज्यादा छोटे-बड़े मैरिज गार्डन, रिसोर्ट एवं शादी हॉल हैं, लेकिन कहीं भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है। गार्डन से निकलने वाला मलबा, गंदा पानी भी खुले में छोड़ा जाता है, जिससे आसपास रिहायशी इलाके में दुर्गंध फैलती है। यहां का डिस्पोजल कचरा एवं बचा हुआ खाना भी खुले में फेंका जाता है।

ऐसे उड़ाते हैं कानून का मजाक :

कई मैरिज गार्डनों में भगदड़ या हादसा होने पर लोगों को बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी गेट नहीं है, यहां विवाह शादियों में भारी भीड़ जमा होती है।

शादियों में आने वाले वाहनों-बसों के लिए पार्किंग एरिया नहीं रखा जाता और पूरी जगह पर निर्माण के बाद सड़कों पर गाड़ियां खड़ी की जाती हैं, इससे हाईवे भी नहीं बच पाता।

मुख्य सड़कों पर डीजे-बारात की वजह से जाम लग जाता है।

मैरिज गार्डनों में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अग्निशमन यंत्र भी नहीं रहते, कई जगह खुले बिजली के तार डालकर साज-सज्जा की जाती है।
कई संचालक कामर्शियल कनेक्शन लिए बिना या डायरेक्ट लाइन डालकर शादियों में बिजली चोरी करते हैं, जबकि इसका पैसा लोगों से वसूला जाता है।

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